गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

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माताओं ने सीखे अनुपूरक आहार के गुर

लेखक: अपना समाचार दिनांक: फ़रवरी 20, 2020
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  • माताओं ने सीखे अनुपूरक आहार के गुर 
    - आंगनबाड़ी केंद्र पर हुआ अन्नप्रासन दिवस का आयोजन 
    - अन्नप्रासन दिवस के अवसर पर शिशुओं को खिलाया गया खीर
    - टीकाकरण के महत्व पर भी दी गई जानकारी

    पूर्णियाँ : आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के देखभाल में बहुत सहायक होता है. यहाँ सभी चीजों की जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती है. मेरे बच्चे को आज यहाँ खीर खिलाकर अन्नप्रासन किया गया. इसके आगे इसे क्या-क्या खिलाया जाना है एवं  बच्चे को किस समय कौन सा टीका दिया जाएगा  इसकी भी जानकारी दी गई. आंगनबाड़ी सेविका दीदी हमेशा बेहतर खान-पान की सलाह देती रहती है. मुझे याद है जब मैं गर्भवती थी तब भी सेविका दीदी ने मुझे अपने खान-पान पर ध्यान देने की बात बताई थी.  यह कहना है लाइन बस्ती पश्चिम, आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 124 पर अन्नप्राशन के लिए आई माता मनीषा कुमारी का. इस केंद्र पर मनीषा के बच्चे सहित अन्य बच्चों का भी अन्नप्रासन कराया गया. पोषित समाज निर्मित करने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है.

    प्रत्येक माह की 19 तारीख को होता है आयोजन:  
    जिले में प्रत्येक माह की 19 तारीख को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 6 माह से अधिक उम्र के बच्चों को खीर खिला कर उनका अन्नप्रासन किया जाता है. इस माह भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन करवाया गया. इस दौरान बच्चों के संपूर्ण देखभाल की जानकारी क्षेत्र की माताओं को दी गई. इसमें माताओं को सेविका द्वारा बच्चे के पोषण के लिए जरूरी आहार की जानकारी दी गई. इसके साथ ही दो बच्चे के माताओ को 2 कटोरी एवं 2 चम्मच भी दिया गया.

    6 माह के बाद से ही अनुपूरक आहार की करें शुरुआत :
    आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 124 पर मौजूद सीडीपीओ सरिता कुमारी ने बताया नवजात शिशुओं को पहले 6 माह तक केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए. लेकिन 6 माह के बाद से ही उन्हें हल्की मात्रा में सुपाच्य भोजन देना शुरू कर देना चाहिए. उन भोजन में दलिया, खीचड़ी, हलवा, दाल आदि दिया जा सकता है. इससे बच्चे के विकास में तेजी आएगी व उसका स्वास्थ्य अच्छा होगा. उन्होंने यह भी बताया 6 माह बाद बच्चों को अनुपूरक आहार के साथ माताओं को स्तनपान भी जारी रखना चाहिए. इन बातों की जानकारी अन्नप्रासन के लिए आई शिशुओं की माताओं को दी गयी. उन्हें अनुपूरक आहार के प्रति बच्चों में रुझान बढ़ाने के लिए अनुपूरक आहार को स्वादिष्ट करने के संबंध में भी विस्तार से बताया गया.

    टीकाकरण के महत्व पर दिया जोर :
    अन्नप्रासन के अवसर पर क्षेत्र की सेविका ने लोगों को बच्चों के टीकाकरण के संबंध की भी जानकारी दी. सेविका रूबी देवी ने इस दौरान बताया कि टीकाकरण बच्चों को गंभीर व घातक बीमारीयों के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए दिया जाता है. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि लोग अपने बच्चों को सभी प्रकार के टीके अवश्य लगवाएं. अन्नप्राशन के बाद माताओं को बच्चों के साफ सफाई पर ध्यान देने, समय पर टीकाकरण करवाने आदि की भी जानकारी दी गई.

    क्या कहते हैं आंकडें :
    राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार पूर्णियाँ जिले में 6 माह से 8 माह तक सिर्फ 18.6 प्रतिशत बच्चे है जिन्हें स्तनपान के साथ पर्याप्त आहार प्राप्त होता है. वहीँ 6 माह से 23 माह के बीच कुल केवल 11.7 प्रतिशत बच्चे हैं जिन्हें पर्याप्त आहार प्राप्त होता है.

    अनुपूरक आहार सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारी :
    • 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें 
    • स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें 
    • शिशु को मल्टिंग आहार(अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें 
    • माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है 
    • शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोडा-थोडा करके कई बार खिलाएं

    संवादक: अमन
    विवरण: आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के देखभाल में बहुत सहायक होता है. यहाँ सभी चीजों की जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती है. मेरे बच्चे को आज यहाँ खीर खिलाकर अन्नप्रासन किया गया. इसके आगे इसे क्या-क्या खिलाया जाना है एवं बच्चे को किस समय कौन सा टीका दिया जाएगा

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