शनिवार, 5 अक्तूबर 2019

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संक्रामक रोगों तथा डायरिया से बचाव को लेकर एएनएम और आशा करेंगी जागरूक

लेखक: अपना समाचार दिनांक: अक्तूबर 05, 2019
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    • बाढ़ के बाद जिले में रैपिड रेस्पांस टीम कर रही है निगरानी
    • डेंगू एवं चिकनगुनिया का भी है खतरा
    • सावधानी व सुरक्षा सबसे बेहतर उपाय


    पूर्णियाँ : 04 अक्टूबर जिला में हुई बारिश के बाद जलजमाव से मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने युद्दस्तर पर एंटी लार्वा केमिकल का छिड़काव करना शुरू कर दिया है. स्थायी जलजमाव व गंदगी से पनपने वाली बीमारियों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग लगातार सर्तक है और किसी भी मामले से निबटने के लिए पूरी तैयारी में है. बारिश के बाद शहर में जलजमाव हो गया था. कई जगहों पर अभी भी काफी पानी भरा है. जबकि कई जगहों से पानी निकल जाने के बाद उन जगहों पर बड़ी मात्रा में कूड़े के मलबे जमा हैं. जिसकी लगातार सफाई की जा रही है. इससे बचने के लिए लोगों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने भी अपना अभियान तेज कर दिया है जिससे कि क्षेत्र के लोग डायरिया तथा अन्य रोगों से बच सकें.
    जिला सिविल सर्जन डॉ मधुसूदन प्रसाद ने कहा कि स्थायी जलजमाव के कारण डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को जन्म देने वाले मच्छर के पनपने के बढ़ते खतरे को देखते हुए विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है. इसकी रोकथाम के लिए जलजमाव वाले सभी जगहों पर एंटी लार्वा केमिकल का छिड़काव युद्धस्तर पर किया जा रहा है। साथ ही बताया कि बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा खतरा डायरिया के होने का होता है. दूषित पानी और भोजन के संपर्क में आने से भी डायरिया हो सकता है.

    रैपिड रेस्पांस टीम कर रही है निगरानी: एंटी केमिकल छिड़काव के काम की मॉनिटरिंग रैपिड रेस्पांस टीम कर रही है. टीम स्थायी जलजमाव वाले क्षेत्र सहित उन सभी गंदगी वाले एरिया को चिन्हित कर वहां छिड़काव कर रही है. टीम की ओर से लोगों को बुखार के लक्षणों की जानकारी दी जा रही है.

    डायरिया से बचाव को लेकर एएनएम और आशा करेंगी जागरूक

    सिविल सर्जन ने बताया कि गांव स्तर पर ओआरएस एवं जिंक की उपलब्धता को बढाने एवं डायरिया प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य कर्मी को इस काम में लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सफाई से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जागरूकता लाना सबसे बड़ा काम है। गांव स्तर पर डायरिया को लेकर जागरूक करने की जिम्मेवारी आशा कार्यकर्ताओं को दी गई है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर ओआरएस और लोगों को डायरिया के बारे में जानकारी देगी। इसके साथ ही बच्चों को साफ सफाई पर ध्यान देने के लिए माताओं से मिलेगी।
    बीमारियों के प्रमुख कारण : दूषित भोजन और पानी, वायरल या बैक्टीरिया संक्रमण, साफ-सफाई का अभाव, पशुओं के साथ रहना इत्यादि कई कारण हैं जो बाढ़ के समय मुख्य रूप से बीमारियों का कारण बनते हैं. इसमें होने वाली बीमारियों में डायरिया प्रमुख है. इसके अलावा चिकनगुनिया एवं डेंगू भी बाढ़ के समय में होने की संभावना ज्यादा होती है.
    डायरिया से बचाव के उपाय : डायरिया यानि दस्त को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का रखरखाव बहुत जरूरी है. टॉयलेट जाने के बाद और खाना बनाने/खाने से पहले डेटॉल लिक्विड हैंडवाश से हमारे हाथ धोने से डायरिया को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. साथ ही पानी को उबालने के बाद छानकर पीने से डायरिया के संक्रमण से बचा जा सकता है|

    वेक्टर जनित रोगों (संक्रामक रोग) से कैसे बचा जा सकता है ?

    डेंगू और चिकनगुनिया का, एडीज एजिप्टी मच्छर द्वारा निर्मित पात्रों/स्थानों में जमा साफ़ व रुके पानी में ही पनपता है | कूलर व अन्य बर्तन जिनमें पानी का संचयन किया जाता है आदि को सप्ताह एक बार सुखाकर ही पुनः प्रयोग में लायें | घर की छतों, बेकार पड़े बर्तनों, गमलों के नीचे ए०सी० से निकालने वाले पानी पक्षियों के लिए रखे गए पानी के बरतन आदि को सप्ताह में एक बार सुखाकर ही प्रयोग में लायें |

    संवादक : अमन

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    विवरण: जिला में हुई बारिश के बाद जलजमाव से मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने युद्दस्तर पर एंटी लार्वा केमिकल का छिड़काव करना शुरू कर दिया है.

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