शनिवार, 7 सितंबर 2019

Tagged Under: , , , ,

पत्नी की अस्थियों के साथ मौत का इंतजार

लेखक: Brajesh Kumar Singh दिनांक: सितंबर 07, 2019
  • शेयर करे
  • छवि स्रोत:आजतक 
    एक और नई प्यार की मिसाल सामने आयी जब पूर्णिया के रुपौली के 87 वर्षीय साहित्यकार भोलानाथ आलोक 27 साल से पत्नी की अस्थियों के साथ कर रहा मौत का इंतजार।

    उन्होंने घर के बगीचे में एक पेड़ पर लटकी पोटली दिखाते हुए कहा कि 27 सालों से पत्नी की अस्थियों को टहनी से टांगकर सुरक्षित रखा है.

    बकौल भोलानाथ, "मेरी पद्मा (पत्नी का नाम) भले ही नहीं हैं, लेकिन ये अस्थियां उनकी यादें मिटने नहीं देतीं. जब भी किसी परेशानी में होता हूं, तो लगता है वह यहीं हैं. बच्चों को भी कह रखा है कि मेरी अंतिम यात्रा में पत्नी की अस्थियों की पोटली साथ ले जाना और चिता पर मेरी छाती से लगाकर ही अंतिम संस्कार करना."

    नम आंखों से भोलानाथ ने कहा कि अपने वादे को निभाने के लिए उन्हें कोई और तरीका नहीं दिखा इसलिए उन्होंने यही तरीका अपनाया. भोलानाथ प्रतिदिन इन अस्थियों को देखते और सहलाते हैं.

    पत्नी की बात करने पर आज भी भोलानाथ की आंखों से आंसुओं के रूप में पत्नी का प्रेम छलक पड़ता है.
    भोलानाथ गर्व से कहते हैं, "इस सामाजिक जीवन के उधेड़बुन में भी मैं पद्मा को नहीं भूला. पत्नी के साथ मर तो नहीं सकता था. परंतु उनके छोड़ जाने का गम मैं अब तक नहीं भूल पाया."

    उन्होंने कहा, "बगीचे के एक आम के पेड़ में उनकी अस्थियां एक कलश में समेट कर रखा हूं. वहीं नीचे तुलसी का पौधा लगा हुआ है."

    आज भोलानाथ की यह प्रेम कहानी लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है. भोलानाथ गर्व से कहते हैं, "यहां ना सही परंतु ऊपर जब पद्मा से मिलूंगा, तब यह तो बता सकूंगा कि मैंने अपना वादा निभाया."

    उन्होंने कहा कि पृथ्वीलोक में हम दोनों साथ जी भले ही नहीं सके पर साथ मरने का सुकून तो जरूर मिलेगा.

    भोलानाथ के दामाद अशोक सिंह कहते हैं कि यह प्रेम का अनूठा उदाहरण है. उन्होंने कहा कि उनकी अंतिम इच्छा हमलोग जरूर पूरी करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसे बिरले ही होते हैं. उन्होंने कहा कि पानी, धूप से बचने के लिए इस कलश को प्लास्टिक और फिर ऊपर से कपड़े से बांधकर रखा गया है.

    स्रोत : NDTV

    0 टिप्पणियाँ:

    टिप्पणी पोस्ट करें