बुधवार, 11 सितंबर 2019

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पोषण पुनर्वास केंन्द्र ने दी दो बहनों को नई ज़िंदगी

लेखक: अपना समाचार दिनांक: सितंबर 11, 2019
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  • भारत में कुपोषण की स्थिति में पिछले वर्षों में काफी सुधार आया है किन्तु भारत अभी भी उन देशों में शामिल है, जहाँ विश्व के सबसे अधिक कुपोषित बच्चे निवास करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में लगभग 45% मृत्यु कुपोषण के कारण होती है | पूर्णियाँ जिले का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) इन्हीं कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का काम कर रहा है| जिले के एनआरसी में अप्रैल 2018 से अगस्त 2019 तक 355 बच्चों को सुपोषित किया जा चुका है|

    केनगर प्रखण्ड की निवासी, नजिस बताती हैं कि उनकी 2 बेटियाँ हैं। बड़ी बेटी तरन्नुम 4 साल की है,14 दिन पोषण पुनर्वास केंद्र में रहकर उसके वजन में लगभग 2 किलो की वृद्धि हुई है तथा छोटी बेटी जो 7 माह की है जिसके वजन में 300 ग्राम की वृद्धि हुई है|

    नाजिस ने बताया उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र की जानकारी उनके क्षेत्र की आंगनवाड़ी सेविका द्वारा पता चली एवं उन्होंने ही जिले में स्थित एनआरसी में अति-कुपोषित बच्चों के इलाज की सम्पूर्ण सुविधा के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब वह अपनी दोनों बेटियों को आंगनवाड़ी केंद्र पर लेकर गयी तो सेविका दीदी ने बताया उनकी दोनों बेटियाँ अति-कुपोषित की श्रेणी में है। इसके लिए उन्होंने दोनों बेटियों को तुरंत पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी। अगले ही दिन नाजिस आँगनवाड़ी सेविका की मदद से अपनी दोनों बेटियों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया। जहाँ चिकित्सकों ने उनकी बेटियों के स्वास्थ्य में सुधार का आश्वासन दिया। एनआरसी की मदद से नाजिस की दोनों बेटियाँ के स्वास्थ में निरंतर सुधार आ रहा है। आज नजिस  अपनी बेटियों  के स्वास्थ्य में आई सुधार को देखकर संतुष्ट है। नाजिस ने कहा अगर एनआरसी में उनकी बेटियों को बेहतर उपचार नहीं मिलता तो शायद वह उन्हें खो देती।

    क्या है पोषण पुनर्वास केंद्र:
    पूर्णियाँ जिले की एनआरसी इंचार्ज डॉ. गुलशन ने बताया यहाँ अतिकुपोषित बच्चे को 14 दिनों के लिए रखा जाता है। डाक्टर की सलाह के मुताबिक ही डाइट दी जाती है। अगर यहां रखा गया कोई बच्चा 14 दिन में कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाता है तो वैसे बच्चों को एक माह तक भी यहां रखा जाता है। बच्चों की देखभाल के लिए यहां स्टाफनर्स, केयरटेकर व कुक तैनात हैं।


    एनआरसी में बच्चे की भर्ती के मानक
    एनआरसी डायटीशियन प्रीति ने बताया बच्चे को एनआरसी में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। 6 माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी लंबाई के आधार पर वजन-3 एसडी (स्टैंडर्ड डेविएशन) से कम हो, बच्चे की मिड अपरआर्म का माप 11.5 सेंटीमीटर से कम हो या दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा होने पर उन्हें यहाँ भर्ती किया जाता है।
    माताओं को मिलता है दैनिक भत्ता
    डा. गुलशन ने बताया यहां पर जीरो से 5 साल तक के बच्चों का 15 फीसद वजन बढ़ने तक इलाज होता है। बच्चे के साथ एनआरसी में रहरही माँ या अभिभावक को दैनिक भत्ते के रूप में प्रतिदिन 50 रूपये दिए जाते हैं। साथ ही दोनों टाइम का खाना भी मिलता है। इलाज के बाद फालोअप के लिए पुनः बच्चे को लाने के लिए मां को 100 रूपये तथा एक दिन का दैनिक भत्ता 50 रूपये मिलता है।
    पोषण पुनर्वास केंद्र पर दी जाने वाली सेवाएं- 
    रेफर किए गए बच्चों की पुन:जांच कर (SAM) अति-कुपोषित की पहचान करना।
    वार्ड में भर्ती बच्चों को एण्टीबायोटिक्स (आइ॰वी॰ व ओरल) से इलाज करना।
    भर्ती किए गये कुपोषित बच्चों की 24 घंटे उचित देखभाल करना।
    सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमियों में सुधार हेतु पूरक खुराक देना।
    भर्ती कुपोषित बच्चों व उनके माताओं को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन देना तथा इसके लिये अभिभावक से कोई शुल्क नहीं लेना।
    माँ एवं देखभाल करने वाले को उचित खान-पान, साफ-सफाई के विषय पर परामर्श देना।
    पोषण पुनर्वास केंद्र में डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक 4 बार फॉलोअप करना।

    संवादक - अमन कुमार

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