शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

बिहार में हथकरघा क्षेत्र के पुनरुद्धार पर वेब संगोष्ठी का आयोजन

लेखक: अपना समाचार दिनांक: अगस्त 07, 2020
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    बिहार यंग थिंकर्स फोरम ने 07 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर एक वेब-संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी का विषय "बिहार में हथकरघा क्षेत्र के पुनरुद्धार" था एवं इसमें देश एवं विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों के हिस्सा लिया।

    पहली वक्ता प्रो (डॉ) एन.विजया लक्ष्मी, IAS (बिहार सरकार के प्रधान सचिव) थी । डॉ. लक्ष्मी ने प्रतिभागियों को हथकरघा उद्योग की मूलभूत बातें बताईं। उन्होंने बताया कि कैसे बिहार में असंगठित क्षेत्र होने की वजह से आज हथकरघा उद्योग का जो योगदान होना चाहिए वह कहीं नज़र नहीं आता है। उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए कि आज कैसे कांजीवरम साड़ी व कई अन्य उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल पाई है। उन्होंने बिहार की बात करते हुए बताया कि बिहार में हम भागलपुरी सिल्क या मधुबनी पेंटिंग की हीं सिर्फ बात करते हैं, पर हमें जरूरत है कई अन्य जैसे बावन बूटी और गया गमछा साड़ी की भी बात करें।



    डॉ. लक्ष्मी ने SWOT एनालिसिस करते हुए कई पहलुओं पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि आज हमें जरूरत है सभी के सहयोग की, अकेले सरकार या कोई अन्य कुछ नहीं कर सकता। सरकार को चाहिए कि वो हथकरघा उद्योग के लिए एक विभाग या निगम जैसी कोई पहल करे। सरकार को जरूरत है वो छोटे ऑपरेशन और पुरानी हो चुकी तकनीकों में इन्वेस्टमेंट करे। आज चीन और बांग्लादेश इस क्षेत्र में हमसे कहीं अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। साथ हीं डॉ. लक्ष्मी ने बात की कैसे बिहार के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये की वजह से बिहार, केंद्र से पूर्ण मदद नहीं ले पा रहा है। वहीं हम उपभोक्ता को चाहिए कि इसका इस्तेमाल करें, इस बात पे उन्होंने एक उदाहरण देते हुए अपनी बात समझाई, पहले शादी-ब्याह में शादी का जोड़ा पहले स्थानीय होता था जो अब बड़े मिलों से आने लगा है। सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने कहा कि आज हथकरघा उद्योग एक बहुत बड़ा मंच है जहाँ हम महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे सकते हैं। 

    कार्यक्रम के दूसरे अतिथि, श्री हिंडोल सेन गुप्ता ने हैंडलूम क्षेत्र में काम करने के अपने वर्षों के अनुभव का जिक्र करते हुए अपना संबोधन प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव में स्थापित लक्जरी ब्रांडों की गुणवत्ता तुलना भारतीय वस्त्र और हथकरघा उत्पादों से हो ही नहीं सकती । उन्होंने चिंता व्यक्त की कि भौगोलिक संकेत (जीआई) टैगिंग पर्याप्त नहीं है और प्रत्येक राज्य अथवा क्षेत्र अपने आप में अद्वितीय है। श्री गुप्ता ने यह भी कहा कि अतुल्य भारत अभियान की तर्ज पर एक "अतुल्य भारत जीआई ’अभियान भी शुरू करना चाहिए जिससे हमारी भारतीय वस्त्र और हथकरघा कहानी को बेहतर ढंग से बाजार में प्रस्तुत किया जा सके।  उन्होंने यह भी कहा कि मिथिला के काम के जादू को एक बड़े वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए एक बड़ा घरेलू उपभोक्ता वर्ग होना चाहिए, और इसके लिए हमें अपने वस्त्र और हथकरघा को महत्व देना होगा।

    श्री गुप्ता ने यह भी कहा कि हमने अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार के अनुकूल नहीं ढला है तथा इस सन्दर्भ में काफी काम करने की आवशकता है ताकि हमारे वस्त्र और हथकरघा उत्पादों  को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन्वेस्ट इंडिया के कार्यक्रम के तहत बिहार के वस्त्र और हथकरघा उत्पादों की एक रिपोर्ट बनाई जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका प्रचार किया जा सके। ऐसा कर के वस्त्र और हथकरघा उद्द्योगों को अपार बढ़ावा मिलने की उन्होंने उम्मीद जताई । श्री गुप्ता ने ये भी उम्मीद जताई कि यह भारत में कपड़ा उद्योगों के पुनरुद्धार के युग की शुरूआत करेगा। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री के अथक प्रयासों के कारण खादी उद्योग का सबसे बड़ा एफएमसीजी ब्रांड बनने के बारे में दी। उन्होंने उपस्थित लोगों से प्रधानमंत्री जी से प्रेरणा लेने तथा भारत को वस्त्र के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने का संकल्प लेने को कहा।

    इस कार्यक्रम में कुछ कलाकार, विशेषज्ञ और उद्यमी भी शामिल हुए| जिनमें नकीब अंसारी, अर्चना सिंह, उज्ज्वल कुमार, चंदना दत्त, शमीमुद्दीन अंसारी, उषा झा, इकबाल अंसारी और बाबर अंसारी थे, जिन्होंने वस्त्रों व अन्य हथकरघा उत्पाद से संबंधित, विशेष रूप से ज़मीनी हक़ीक़त में काम करने के बारे में अपने विचार, मुद्दों और अनुभवों को साझा किया। महामारी की स्थिति में उन्होंने कपड़ा उद्योगों की स्थिति को सुदृढ़ करने और कुशल श्रमिकों को सशक्त बनाने के लिए कई सुझाव दिए। यह आयोजन बिहार में हथकरघा और कपड़ा के पुनरुद्धार के लिए निर्धारित रोडमैप के साथ एक सकारात्मक टिप्पणी पर समाप्त हुआ।

    शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

    बिहार यंग थिंकर्स फोरम ने आज वेब-संगोष्ठी का किया आयोजन

    लेखक: अपना समाचार दिनांक: जुलाई 31, 2020
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  • BYTF Crona Conversation

    बिहार यंग थिंकर्स फोरम ने ३० जुलाई को एक वेब-संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी का विषय "कोविड-19: प्रसंग, चुनौतियां और समाधान था एवं इसमें देश एवं विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों के हिस्सा लिया । बिहार में बिगड़ती महामारी की स्थिति और उससे उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर, बिहार यंग थिंकर्स फोरम ने विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों को एक मंच पर लाकर कोविड-19 की समस्याओं और समाधानों के बारे में लोगों को जागरूक किया ।

     

    पहली वक्ता प्रो (डॉ) उमा कुमार, विभागाध्यक्ष, डिपार्टमेंट ऑफ रयूमेटोलॉजी, एम्स, नई दिल्ली थी । डॉ कुमार ने प्रतिभागियों को COVID -19 की मूल बातें बताईं और इसके लक्षणों, प्रवेश तंत्र और माध्यमों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मास्क का उपयोग करने, सामाजिक दूरी बनाये रखने और नियमित हाथ धोने के संबंध में कुछ व्यावहारिक सावधानियां दोहराईं। वर्तमान में निदान के लिए विभिन्न तकनीकों के बारे में भी उन्होंने विस्तृत जानकारी दी । RT-PCR टेस्ट और एंटीजन टेस्ट का उदहारण देते हुए उन्होंने बताया कि टेस्टिंग तभी आवश्यक है जब किसी को सांस लेने में तकलीफ होने लगे। बिहार पर विशेष ध्यान देने के साथ, प्रो कुमार ने कहा कि यद्यपि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा बिहार में अन्य राज्यों से पिछड़ा हुआ है, फिर भी डॉक्टर समुदाय एवं सरकारी तंत्र कोरोना महामारी की चुनौती को संबोधित करने की पूरी कोशिश कर रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों को भी संबोधित किया और वायरस से बचाव के लिए विभिन्न सलाहें दी। उन्होंने कोरोना मरीज़ों के ठीक होने की उच्च दर, टीकाकरण की संभावनाओं और समग्र रूप से मानव जाति के लिए बेहतर कल होने के संबंध में एक आशावादी नोट पर अपनी बात समाप्त की।

     

    श्री अजय शर्मा, मोटिवेशनल स्पीकर, जीवनशैली कोच, सर्टिफाइड योगा ट्रेनर, और हेल्थ डालन (कनाडा) के संस्थापक ने मुंगेर स्कूल ऑफ योग में अपनी जीवन यात्रा और योग में दीक्षा के बारे में बताया । श्री शर्मा ने विटामिन डी और कोविद-19 के बीच संबंध पर एक विस्तृत और सूचनात्मक प्रस्तुति की और ये बताया कि  कैसे विटामिन-डी की कमी मरीज़ों की मृत्यु दर में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। उन्होंने विटामिन डी के विभिन्न स्रोतों और इसके पूरक के बारे में भी जानकारी दी। श्री अजय ने हमारे दैनिक दिनचर्या की उन अंतर्निहित स्थितियों का भी वर्णन किया है जिनसे कोरोना महामारी की स्थिति में घातक वृद्धि हुई है। वर्तमान परिदृश्य को 'समृद्ध लोगों की महामारी' के रूप में बताते हुए, सर ने जीवनशैली संबंधी विकारों को कम करने के लिए योगासन, उपवास और कसरत जैसे कई तरीके सुझाए।

     

    श्री कुणाल, आईएएस अधिकारी, सत्र के तीसरे वक्ता थे और वर्तमान में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, गोवा राज्य के रूप में कार्यरत हैं । उन्होंने महामारी की स्थिति में विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक गतिविधियों और स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका का वर्णन किया। श्री कुणाल ने विभिन्न मोर्चों पर सरकारों द्वारा की गई पहलों के बारे में बताया। प्रतिभागियों से सवालों के जवाब देते हुए, उन्होंने लोगों से जारी दिशानिर्देशों और सावधानियों का सख्ती से पालन करने की भी अपील की। कोविड-19 की स्थिति को काबू करने और संक्रमितों के लिए सामाजिक समर्थन की आवश्यकता को दोहराते हुए, उन्होंने सार्वजनिक जागरूकता के लिए आह्वान किया।  बिहार के श्रमिकों के दूसरे राज्यों से पुनः बिहार में पलायन करने एवं महामारी और बाढ़ की स्थिति से निपटने की प्रशासन की भूमिका की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने राज्य में प्रौद्योगिकी के नव स्थापना और व्यापक कोरोना परीक्षण पर बल दिया।

     

    एक बेहद ही ज्ञानवर्धकऔर उत्साहजनक सत्र, एक सकारात्मक दृष्टि प्रदान करते हुए समाप्त हुआ। वक्ताओं ने आशा व्यक्त की कि राज्य में स्वास्थ्य मशीनरी का समर्थन करने और समाज में जागरूकता पैदा करने के लिए BYTF जैसे नागरिक समाज समूहों और मंचों की भूमिका भविष्य में और प्रखर होगी।

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    गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

    बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

    आयुष्मान भारत का लोग उठा रहे लाभ

    लेखक: अपना समाचार दिनांक: फ़रवरी 26, 2020
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